राजनीति की सड़क पर
कवि: जसिंता केरकेटा
अब यह लिंग धीरे-धीरे बन्दूक में तब्दील हो रहा है इसके ज़रिए एक साथ किसी ख़ास समुदाय का बलात्कार किया जाएगा
सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

कविताएँ
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कवि: जसिंता केरकेटा
अब यह लिंग धीरे-धीरे बन्दूक में तब्दील हो रहा है इसके ज़रिए एक साथ किसी ख़ास समुदाय का बलात्कार किया जाएगा
कवि: सुभद्राकुमारी चौहान
परिमल-हीन पराग दाग़-सा बना पड़ा है हा! यह प्यारा बाग़ ख़ून से सना पड़ा है
कवि: पराग पावन
वे स्त्रियाँ याद आती हैं जो निमंत्रण की तरह आयी थीं और त्यौहारों की तरह चली गयीं जिनकी आवाज़ में कास के फूल झूमते थे?