बेरोज़गार
कवि: पराग पावन
वे स्त्रियाँ याद आती हैं जो निमंत्रण की तरह आयी थीं और त्यौहारों की तरह चली गयीं जिनकी आवाज़ में कास के फूल झूमते थे?
सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

परिचय
पराग पावन समकालीन हिंदी साहित्य के कवि हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार और आधुनिक जीवन के यथार्थ की स्पष्ट अभिव्यक्ति मिलती है। 'बेरोज़गार' उनकी प्रमुख कविताओं में से एक है।
कविताएँ
कवि: पराग पावन
वे स्त्रियाँ याद आती हैं जो निमंत्रण की तरह आयी थीं और त्यौहारों की तरह चली गयीं जिनकी आवाज़ में कास के फूल झूमते थे?
किताबें
इस कवि की कोई किताब अभी अभिलेख में उपलब्ध नहीं है।