जलियाँवाला बाग़ में वसंत
कवि: सुभद्राकुमारी चौहान
परिमल-हीन पराग दाग़-सा बना पड़ा है हा! यह प्यारा बाग़ ख़ून से सना पड़ा है
सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

परिचय
सुभद्राकुमारी चौहान (1904–1948) हिंदी साहित्य की सुप्रसिद्ध कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी थीं। वे राष्ट्रीय चेतना, वीर रस तथा वात्सल्य भाव की कविताओं के लिए विशेष रूप से जानी जाती हैं। 'झांसी की रानी' और 'जलियाँवाला बाग़ में वसंत' उनकी कालजयी रचनाएँ हैं।
कविताएँ
कवि: सुभद्राकुमारी चौहान
परिमल-हीन पराग दाग़-सा बना पड़ा है हा! यह प्यारा बाग़ ख़ून से सना पड़ा है
किताबें
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