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शहर में सूर्यास्त

सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'

उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'

1936–1975Khevali, Varanasi, India

सुदामा पाण्डेय 'धूमिल' (1936–1975) साठोत्तरी हिंदी कविता के अत्यंत सशक्त और जनपक्षधर कवि थे। अपनी तीखी राजनीतिक चेतना और बेबाक शैली के लिए विख्यात धूमिल ने 'संसद से सड़क तक' जैसे संग्रहों के माध्यम से समकालीन समाज और राजनीति के अंतर्विरोधों पर गहरा प्रहार किया। उन्हें मरणोपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

जनकवि नागार्जुन (वास्तविक नाम: वैद्यनाथ मिश्र) प्रगतिशील काव्यधारा के मूर्धन्य कवि, उपन्यासकार और गद्यकार हैं। उन्होंने हिंदी और मैथिली (यात्री उपनाम से) में युगीन यथार्थ, जन-आकांक्षाओं और राजनीतिक विद्रूपताओं पर अत्यंत प्रखर, तीखी और व्यंग्यात्मक कविताएँ लिखीं। लोक-जीवन से गहरा जुड़ाव उनकी कविताओं की मुख्य विशेषता है।