मुख्य सामग्री पर जाएँ
महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ
आप कविताबोल की नई वेबसाईट का BETA संस्करण देख रहे हैं। इस्तेमाल के दौरान प्रकाशित सामग्री में कुछ त्रुटियाँ अथवा उपलब्ध सुविधाओं में असंगतियां हो सकती हैं। अपने सुझाव हमें भेजने के लिए इस लिंक पर क्लिक करेंTEST - कविताबोल का अगला Open Mic Event 26 अगस्त को होने जा रहा है। इसमें भाग लेने के लिए अथवा ज़्यादा जानकारी के लिए हमारे आयोजन पेज पर जाएँ
आप कविताबोल की नई वेबसाईट का BETA संस्करण देख रहे हैं। इस्तेमाल के दौरान प्रकाशित सामग्री में कुछ त्रुटियाँ अथवा उपलब्ध सुविधाओं में असंगतियां हो सकती हैं। अपने सुझाव हमें भेजने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें1/2

शहर में सूर्यास्त

सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'

उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

← कविताओं पर लौटें

शायर की ज़ुबानी

कवि: अदम गोंडवी

कभी आकर जिले में आप सामंती ठसक देखें

कहा जाता है यू.पी. में न राजा है न रानी है

महज़ सड़कों पे गड्ढे हैं न बिजली है न पानी है

हमारे शहर गोंडा की फ़िज़ा कितनी सुहानी है

कभी आकर जिले में आप सामंती ठसक देखें

कहा जाता है यू.पी. में न राजा है न रानी है

अपना घर नहीं है राम का घर हम बनाते हैं

इसे जादूगरी कहिए या कहिए लन्तरानी है

किलो के भाव नैतिकता को हम नीलाम करते हैं

दावा ये कि अपनी अस्मिता हमको बचानी है

डकैती कत्ल दंगा धर्म की रक्षा में करते हैं

हमारे कर्म में दरिया ये सरयू की रवानी है

जिससे बुद्ध के किरदार की महकार आती है

उस जनपद की पीड़ा एक शायर की ज़ुबानी है

कविता साझा करें